एग्जिट पोल के नतीजों में एनडीए 300 सीट के पार, क्या फिर एक बार मोदी सरकार?

2019 ke महासंग्राम mein 23 मई ke नतीजों ka इंतजार अभी बाकी hai लेकिन लगभग सभी एग्जिट पोल कह रहे hain ki एनडीए आसानी ke साथ सरकार बनाने ja रही hain. यूपीए ko 2014 ke मुकाबले भले थोड़ा fayda पहुंचता दिख raha ho लेकिन बहुमत ke आंकड़े se वो बहुत-बहुत दूर hain.  2014 ke एग्जिट पोल mein sabse सटीक भविष्यवाणी karne वाले न्यूज 24-चाणक्य ke पोल mein एनडीए ko pahle se bhi कहीं ज्यादा यानी 350 सीटें मिलने ja रही hain. वहीं यूपीए ko 95 aur अन्य ko 97 सीटें दिखाई गई hain.

न्यूज 18-इप्सॉस ke पोल mein एनडीए ko 336 सीटें दिखाई गईं hain. aapko bata de ki ये आंकड़ा ठीक 2014 जितना hi hain. वहीं यूपीए ko 82 aur अन्य ko 124 सीटें di गई hain.

टाइम्स नाउ-वीएमआर ke मुताबिक एनडीए ko 306, यूपीए ko 132 aur अन्य ko 104 सीटें मिली hain. न्यूज नेशन ne apne एग्जिट पोल mein एनडीए ko 282 se 290 ke बीच सीटें di hain. यूपीए 118 se 126 सीट ke बीच झूल raha hain. वहीं अन्य ko 130 se 138 सीटें मिली hain.

इंडिया टीवी-सीएनएक्स ke एग्जिट पोल mein bhi एनडीए ko 300 सीट मिली hain. यूपीए ko 120 aur अन्य ko 122 सीटें दिखाई गई hain.

'सबका साथ सबका विकास' se 'आएगा to मोदी hi' tak


जहां 2014 mein मोदी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' ke नारे par apne प्रचार ko आगे बढ़ाती दिखी थी वहीं is baar नाम ke आगे 'चौकीदार' लगाने se लेकर 'आएगा to मोदी hi' जैसे तमाम वाक्यों ko प्रचार अभियान ka hissa बनाया गया। नरेंद्र मोदी ne देश भर mein करीब डेढ़ लाख किलोमीटर ki यात्रा ki aur 142 रैलियों ko संबोधित किया। जहां राहुल गांधी 'चौकीदार चोर hai' ke साथ apna अभियान आगे बढ़ाते रहे वहीं मोदी ne तमाम रैलियों mein ये kahte हुए इसे भुनाया ki 'मैं गाली ko गहना बना लेता हूं।'

कुछ ऐसी दिखती hai पूरी तस्वीर


एग्जिट पोल: लोकसभा चुनाव 2019

कुल सीट: 542, बहुमत: 272
सर्वे एजेंसी
एनडीए
यूपीए
अन्य
News 24 - Chanakya
350
95
97
India TV - CNX
300
120
122
Aaj Tak- Axis
339-365
77-108
79-111
News18 - Ipsos
336
82
124
ABP - Nielsen
267
127
148
Times Now - VMR
306
132
104
News Nation
282-290
118-126
130-138
Republic - C Voter
305
124
113
Average
314
111
117

2014 के चुनाव नतीजे

2014 में भाजपा को 282 सीटें मिली थी जबकि कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई थी एवं अन्य को 211 सीटें मिली थी इस बार उम्मीद है कि भाजपा पिछले वर्ष भाजपा पिछले चुनाव से ज्यादा सीट लाएगी और यही चीज साड़ी एग्जिट पोल्स भी दिखा रहे हैं एग्जिट पोल की माने तो भाजपा 300-350 सीटें ला सकती है और अकेले अपने दम पर बहुमत की सरकार बना सकती है|  News24 और चाणक्य के सर्वे को माने तो एनडीए 350 का आंकड़ा छू सकती है, इस चुनाव से यह स्पष्ट होता है कि भारत की जनता एक मजबूत सरकार चाहती है और मोदी जी के नेतृत्व में यह पॉसिबल है | कांग्रेस को इस चुनाव में भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है कोई भी एग्जिट पोल उन्हें 50 से ज्यादा सीटें नहीं दिखा रहा क्योंकि कांग्रेस के लिए बहुत दुख की खबर है|

यह बस एग्जिट पोल की ही रुझान है आखरी नतीजा 23 तारीख को ही घोषित होगा आप अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं कि क्या भाजपा अकेले दम पर अपनी सरकार बना सकती है या फिर कांग्रेस 50 से ज्यादा सीटें ला पाएगी आप अपनी राय जरूर हमें बताएं|
धन्यवाद!

पांच साल में पीएम मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस, कहा- 17 मई 2014 को हुई थी ईमानदारी की शुरुआत

सातवें चरण ke चुनाव प्रचार ke अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी aur भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ne प्रेस कांफ्रेंस की। पांच साल mein ये पहली baar hai jab पीएम मोदी ne प्रेस कांफ्रेंस ki hain. is दौरान अमित शाह ne मोदी सरकार ki उपलब्धियों ko सामने रखा। pahle अमित शाह ne अपनी baat रखी aur मोदी उनके साथ बैठे रहे। इसके बाद पीएम मोदी ne मीडिया se baat की। 

पांच साल में पीएम मोदी की पहली प्रेस कांफ्रेंस, कहा- 17 मई 2014 को हुई थी ईमानदारी की शुरुआत
पीएम मोदी की प्रेस कांफ्रेंस
Photo: ANI

पीएम मोदी ne क्या-क्या कहा


  • pahle main aapke साथ hi चाय पीता था। मध्यप्रदेश se सीधा आया हूं।
  • 2014 चुनाव mein आईपीएल बाहर कराना पड़ा था। 
  • बहुत लंबे समय बाद देश mein ऐसा hoga jab लगातार दूसरी baar koi पूर्ण बहुमत वाली सरकार आएगी।
  • सरकार सक्षम होती hai to रमजान bhi hota hai, आईपीएल bhi चलता hai, बच्चों ka एक्जाम bhi चलता hain. 
  • जनता pahle se ज्यादा बढ़ चढ़कर आशीर्वाद de रही hain.
  • पिछली baar 16 मई ko नतीजा आया था। 17 मई ko बहुत बड़ी कैजुल्टी huyi थी, आज bhi 17 मई hain. सट्टाखोरों ko मोदी ki हाजिरी ka अरबो-खरबों ka घाटा hua था।
  • तब सट्टा कांग्रेस ki 150 सीटों ke liye चलता tha, भाजपा ka 200 ke aaspaas चलता tha, सबके सब डूब gye थे। ईमानदारी ki शुरुआत 17 मई ko ho गई थी।

अमित शाह ne कहा- 


  • हमारी सरकार फिर se बनने ja रही hain. 
  • मोदी ne हर योजना par कड़ी नजर रखी hain. 
  • 5 साल mein 133 योजनाएं लेकर आए।
  • मोदी सरकार ne दुनिया mein देश ka मान बढ़ाया hain.
  • पहला चुनाव जिसमें विपक्ष ki ओर se महंगाई-करप्शन ka मुद्दा nahi hain.
  • हमारी सरकार mein हर क्षेत्र mein विकास hua hain.
  • जितने चुनाव हुए उसमें हमें जीत मिली hain. 
  • ये sabse विस्तृत चुनाव raha hain.
  • हर 15 दिन mein ek योजना शुरू की।
  • 2014 mein 6 सरकारें थीं अब 16 सरकारें hain. 
  • साध्वी प्रज्ञा aur भगवा आतंक par शाह ka जवाब 
  • is दौरान सवाल जवाबों ka दौर चला। ek सवाल ke जवाब mein अमित शाह ne कहा ki भाजपा apne बूते par बहुमत हासिल करेगी, 300 se ज्यादा सीटें लाएंगे। हमारे सहयोगी साथ rahenge, मोदी जी प्रधानमंत्री होंगे। सरकार एनडीए ki hi होगी। agar kisi ko सम्मान ke साथ हमारे साथ जुड़ने ki इच्छा होगी to हमारे दरवाजे खुले hain. 


साध्वी प्रज्ञा ke नाथूराम गोडसे par दिए बयान ko लेकर अमित शाह ne कहा- पार्टी ne उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी kiya hai aur 10 दिन ke भीतर जवाब देने ko कहा hain. jab वह जवाब देंगी to पार्टी ki अनुशासन समिति is par उचित कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा- प्रज्ञा ठाकुर ki उम्मीदवारी फर्जी भगवा आतंक ke खिलाफ सत्याग्रह hain. main कांग्रेस se कहना चाहता ki समझौता एक्सप्रेस मामले mein कुछ लोग गिरफ्तार हुए थे jo लश्कर ए तोएबा se जुड़े थे। इसमें भगवा आतंक ka फर्जी केस बनाया gya tha aur आरोपी ko छोड़ दिया gya hain. भगवा टेरर काल्पनिक बातें hain. कांग्रेस पार्टी ne हिंदू संस्कृति ko बदनाम kiya hain.

प. बंगाल mein हिंसा ke सवाल par शाह ne कहा- पिछले डेढ़ साल mein 80 भाजपा कार्यकर्ताओं ki हत्या huyi hain. is बारे mein ममता बनर्जी ko kya कहना hain. agar हम इसके liye जिम्मेदार hain to बाकी जगहों par हिंसा क्यों nahi हुई।

राफेल ke सवाल par भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ne कहा ki agar राहुल गांधी ke पास पुख्ता सबूत थे to सुप्रीम कोर्ट mein क्यों nahi दिए। राहुल ko सभी तथ्यों ko सुप्रीम कोर्ट ke समक्ष rakhne चाहिए थे।
is par पीएम hi जवाब de jaroori nahi hain. कांग्रेस par bhi कई आरोप lagate hain to kya उन्होंने जवाब दिया।

अमित शाह ne कहा ki देश ke रक्षा मंत्री ne संसद ke अंदर हर baat ka जवाब दिया aur राहुल गांधी सुनने ke liye bhi nahi बैठे।

ममता बनर्जी का मोदी पर जोरदार हमला, कहा- हिंसा में टीएमसी का हाथ साबित करें वरना जेल में डाल दूंगी

ममता बनर्जी का मोदी पर जोरदार हमला, कहा- हिंसा में टीएमसी का हाथ साबित करें वरना जेल में डाल दूंगी
Photo: ANI

बंगाल ke मथुरापुर mein रैली करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पीएम मोदी par जमकर बरसीं। ममता ne मोदी ko जेल mein डालने tak ki बड़ी baat कह डाली। ममता ne कहा,

बीती raat हमें पता laga ki भाजपा ne चुनाव आयोग mein शिकायत di hai ताकि नरेंद्र मोदी ki जनसभा ke बाद हम koi जनसभा न kar सकें। चुनाव आयोग, भाजपा ka भाई hain. pahle ये ek निष्पक्ष संस्था थी। अब हर koi कहता hai ki चुनाव आयोग ko भाजपा ne खरीद लिया hain. main दुखी हूं लेकिन मुझे कुछ nahi कहना। main जेल जाने ke liye तैयार हूं। लेकिन सच कहने se nahi डरती। वो (पीएम मोदी) kahte hain ki विद्यासागर ki मूर्ति बनाएंगे। बंगाल ke पास मूर्ति बनाने ke liye पैसा hain. kya वो 200 साल पुरानी विरासत वापस de सकते hain? हमारे पास सुबूत hai aur aap kahte ho टीएमसी ne किया। kya aapko शर्म nahi आती? उन्हें इतना झूठ बोलने ke liye उठक बैठक karna चाहिए। आरोपों ke सुबूत de वरना हम aapko जेल mein डाल देंगे।

गिरिराज सिंह ne kya कहा?

बिहार भाजपा ke कद्दावर नेता गिरिराज सिंह ne पश्चिम बंगाल ki मुख्ममंत्री ममता बनर्जी ko आड़े हाथों लिया hain. केंद्रीय मंत्री ne कहा ki ममता दीदी ke रहते बंगाल mein चुनाव ठीक se संभव nahi hain. ऐसे mein वैकल्पिक व्यवस्था हो। ममता बनर्जी ne बंगाल ko लंका ne बना दिया hai अब इसे लोग hi हनुमान बन बचाएंगे।

अमित शाह ke रैली mein hua kya tha?

मालूम ho ki कोलकाता mein अमित शाह ki रैली se pahle शुरू हुए बवाल ke बाद रोड शो ke दौरान हिंसा huyi थी। भाजपा इसके liye ममता सरकार par आरोप laga रही hai, to वहीं सीएम ममता बनर्जी ne भाजपा par गुंडागर्दी ka आरोप लगाया hain. 

बंगाल का बवालः ममता बनर्जी की जमीन और मजबूत होती भाजपा

पश्चिम बंगाल mein अमित शाह ke रोड शो ke दौरान huyi जबरदस्त हिंसा ke liye बीजेपी aur तृणमूल कांग्रेस दोनों ne ek दूसरे par गंभीर आरोप लगाए hain. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ne आरोप लगाया hai ki पश्चिम बंगाल mein उनकी बढ़ती लोकप्रियता se घबराकर जनता ko डराने ke liye टीएमसी नेताओं ne ये हमले कराए hain. agar केंद्रीय बलों ke जवान न होते to मंगलवार ko उनका बचना bhi संभव न होता। जबकि टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन ne कुछ वीडियो शेयर kar आरोप लगाया hai ki बीजेपी ke बाहर se आए समर्थकों ne बंगाल mein हिंसा ko अंजाम दिया hain. इन आरोपों-प्रत्यारोपों ke बीच जहां भाजपा is baar सत्ता tak पहुंचने ke liye पश्चिम बंगाल se ढेरों उम्मीदें पाले बैठी hai, वहीं भाजपा ki बढ़ती ताकत ममता बनर्जी ke liye is चुनाव ke साथ-साथ भविष्य mein bhi बड़ा खतरा बन सकती hain. यही वजह hai ki दोनों hi दलों ne बंगाल mein apna सब कुछ झोंक rakha hain.
बंगाल का बवालः ममता बनर्जी की जमीन और मजबूत होती भाजपा
Amit Shah
Photo: ANI

भाजपा ka बड़ा सियासी दांव

राजनीतिक विश्लेषकों ka कहना hai ki उत्तर प्रदेश mein सपा-बसपा ke जातीय समीकरणों ke गठबंधन se भाजपा ko कड़ी टक्कर मिल रही hain. पिछले चुनाव mein यूपी ki 80 mein se 73 सीटों ko हासिल karne वाले एनडीए ko यहां कितने par सिमटना पड़ जाएगा, कहना मुश्किल hain. यूपी ki is संभावित कमी ki भरपाई ke liye बीजेपी ne जिन राज्यों se उम्मीदें पालीं वे पश्चिम बंगाल, उड़ीसा aur पूर्वोत्तर ke राज्य थे।

पार्टी सूत्रों ke मुताबिक पूर्वोत्तर mein बीजेपी ko अच्छी सफलता मिलती दिख रही hai, लेकिन नवीन पटनायक ki jameen उड़ीसा mein बीजेपी बड़ी सेंध लगाने mein नाकाम रही hain. यही कारण hai ki अब बीजेपी ki सारी उम्मीदें पश्चिम बंगाल par केंद्रित ho गई hain.

भाजपा ke केंद्रीय नेता लगातार पश्चिम बंगाल mein डेरा डाले हुए hain. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहित बीजेपी ke फायर brand नेता योगी आदित्यनाथ लगातार वहां par प्रचार kar रहे hain. पूरी रणनीति ke तहत पार्टी यहां वोटों ke विभाजन ki कोशिश kar रही hain. उसकी रैलियों mein jai श्रीराम ka नारा केवल पश्चिम बंगाल mein hi सुनने ko मिल raha hai to yeh बेवजह nahi hain. उनकी सभाओं mein उमड़ रही भीड़ ममता बनर्जी ki चिंता बढ़ा रही hain. 

कुल 42 लोकसभा सीटों वाले पश्चिम बंगाल se भाजपा ki उम्मीदें उसी समय बढ़ गईं थीं jab उसने त्रिपुरा mein वामपंथी शासन ko उखाड़ फेंकने mein सफलता पाई थी। पश्चिम बंगाल mein वामदलों ke कमजोर hone se भाजपा ko उस रिक्त स्थान ko भरने ki इच्छा hain. पंचायत aur शहरी निकाय चुनावों mein usay मिली शानदार सफलता ne बीजेपी ke उम्मीदों ko पंख laga दिए hain. बीजेपी नेता पश्चिम बंगाल mein 42 mein se 23 सीटों ko जीतने ka दावा karne लगे hain.

अमित शाह ka दावा to isse bhi ज्यादा सीटों ko जीतने ka hai, लेकिन agar वह बड़ी जीत न bhi हासिल kar सके to bhi आने वाले विधानसभा चुनावों ke liye वह टीएमसी ke liye ek बड़ा खतरा बनकर उभरी hain. यही कारण hai ki टीएमसी bhi apna गढ़ बनाए rakhne ke liye पूरी कोशिश kar रही hain. दोनों पक्षों ki yeh कोशिश राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप se आगे निकलकर हिंसा tak पहुंच चुकी hain. 

सातवें चरण mein पश्चिम बंगाल ki नौ सीटों par मतदान

लोकसभा चुनाव ke अंतिम चरण mein 19 मई ko सात राज्यों aur ek केंद्र शासित प्रदेश ki कुल 59 सीटों par मतदान होना hain. इसमें पंजाब aur उत्तर प्रदेश ki तेरह-तेरह सीटों ke अलावा पश्चिम बंगाल ki नौ, मध्य प्रदेश aur बिहार ki आठ-आठ, हिमाचल प्रदेश ki चार, झारखंड ki तीन aur ek सीट चंडीगढ़़ ki सीट par मतदान होना hain.

हासिल करेंगे अप्रत्याशित जीत- बीजेपी

भाजपा ke राष्ट्रीय प्रवक्ता सुदेश वर्मा ka कहना hai ki पूरे देश mein पश्चिम बंगाल hi ek मात्र राज्य hai जहां हिंसा ho रही hai जबकि दूसरे राज्यों mein जहां कांग्रेस, टीडीपी ya अन्य दल शासन mein hain, वहां bhi हिंसा nahi ho रही hain. उनका आरोप hai ki टीएमसी नेताओं ki शह par yeh ho raha hain. इसके जरिय़े वे बीजेपी ko आगे बढ़ने se रोकना चाहते hain. बीजेपी नेता ne कहा ki पश्चिम बंगाल se हमारी उम्मीदें केवल 23 सीटों ki थी। लेकिन जनता ka प्यार देखकर yeh तय ho gya hai ki yeh आंकड़ा isse bhi आगे जाकर रुकेगा।

बंगाल mein हिंसा ke दौरान तोड़ी गई ईश्वरचंद्र विद्यासागर ki 200 साल पुरानी मूर्ति, जानिए इतिहास

कोलकाता mein भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ke रोड शो ke दौरान huyi हिंसा mein मंगलवार ko कॉलेज परिसर mein स्थित महान दार्शनिक, समाजसुधारक aur लेखक ईश्वरचंद विद्यासागर ki मूर्ति तोड़ di गई थी। जिसके liye टीएमसी ne भाजपा कार्यकर्ताओं aur समर्थकों par आरोप लगाया hain. इसी घटना ka विरोध जताते हुए सांकेतिक तौर par टीएमसी aur पार्टी नेताओं ne apne ट्विटर प्रोफाइल फोटो mein विद्यासागर ki तस्वीर लगाई hain. 1872 उच्च शिक्षा ke liye ना केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे bharat ke liye ek महत्वपूर्ण साल mana jata hain. yeh ऐसा पहला निजी कॉलेज hai, jise भारतीयों ne चलाया, इसमें पढ़ाने वाले शिक्षक bhi तभी se Bharatiy hi रहे।यहां tak ki कॉलेज ka वित्तीय प्रबंधन bhi Bharatiy hi करते रहे।
बंगाल mein हिंसा ke दौरान तोड़ी गई ईश्वरचंद्र विद्यासागर ki 200 साल पुरानी मूर्ति, जानिए इतिहास
बंगाल mein हिंसा ke दौरान तोड़ी गई ईश्वरचंद्र विद्यासागर ki 200 साल पुरानी मूर्ति, जानिए इतिहास
Image Source: ANI


पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर ke उत्साह, आकांक्षा aur बलिदान ke कारण, कॉलेज ne 1879 mein स्नातक स्तर tak ki शिक्षा ke liye विश्वविद्यालय ko मान्यता प्राप्त कराई। बीएल कोर्स ke liye कॉलेज ko 1882 mein मान्यता मिली। is कॉलेज ke खुलने se उच्च शिक्षा mein यूरोपियों ka एकाधिकार समाप्त ho गया। कॉलेज ke संस्थापक ईश्वरचंद्र विद्यासागर ka निधन 29 जुलाई, 1891 ko ho gya tha, जिसके बाद साल 1917 mein कॉलेज ka नाम बदलकर विद्यासागर कॉलेज kiya गया। इसी दौरान ये मूर्ति यहां स्थापित ki गई थी।

is कॉलेज ka उद्देश्य मध्यम वर्गीय हिंदुओं ko kam पैसों mein उच्च शिक्षा प्रदान karna था। is कॉलेज ke शुरु hone se pahle tak उच्च शिक्षा ke liye विदेश जाना पड़ता था। लेकिन जिनके पास विदेश जाने ke liye पैसे nahi होते थे, वो उच्च शिक्षा प्राप्त nahi kar पाते थे।

भाजपा ne चुनाव आयोग se कार्रवाई ki मांग ki

कोलकाता mein अमित शाह ki रैली se pahle हुए बवाल aur हिंसा ke बाद सियासत तेज ho गई hain. भाजपा इसके liye ममता सरकार par आरोप laga रही hai, to वहीं सीएम ममता बनर्जी ne भाजपा par गुंडागर्दी ka आरोप लगाया hain. भाजपा ne चुनाव आयोग se हिंसा ki शिकायत करते हुए तत्काल कार्रवाई ki मांग kar रही hain.

मंगलवार ko कोलकाता mein अमित शाह ki रैली रोक di गई थी। कोलकाता पुलिस ne कागजात ki मांग करते हुए मंच हटाने ko कहा था। इसके बाद आदर्श आचार संहिता उल्लंघन ka हवाला dete हुए सड़कों par लगे पीएम मोदी-शाह aur भाजपा ke कई बैनर-पोस्टर aur होर्डिंग हटा दिए gye थे। इसके बाद shaam mein अमित शाह ki रैली ke दौरान हिंसा huyi थी।

कोलकाता mein अमित शाह ke रोड शो ke दौरान हिंसा ko लेकर महाराष्ट्र ke सीएम देवेंद्र फड़णवीस ne ममता बनर्जी par निशाना साधते हुए कहा hai ki वह अपनी हार se डरी huyi hain, इसलिए वह लोकतंत्र ki हत्या kar रही hain. वह nahi चाहतीं ki उनके खिलाफ ek bhi चुनावी प्रचार अभियान हो। उन्होंने चुनाव आयोग se स्वच्छ aur निष्पक्ष मतदान संपन्न कराने ki मांग ki hain.

पीएम मोदी बोले, जम्मू-कश्मीर mein आतंकवाद ka जहर घोलने ke liye Congress aur PDP जिम्मेदार

खास बातें


  • विजय संकल्प रैली se huyi जम्मू-कश्मीर mein चुनाव प्रचार ki शुरुआत
  • मोदी बोले, पाक mein दुआ मांगी ja रही hai ki चौकीदार सत्ता se हट जाए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ne गुरुवार ko जम्मू-कश्मीर mein चुनाव प्रचार अभियान ki शुरूआत की। वह रायपुर दोमाना विधानसभा क्षेत्र ke डूमी गांव mein भाजपा ki विजय संकल्प रैली पहुंचे hain. रैली mein पीएम मोदी ne bharat माता ki jai ke नारे se डोगरी mein apna उद्बोधन शुरू किया। जिसके बाद उन्होंने आतंकवाद सहित कांग्रेस, नेकां aur पीडीपी par जमकर हमला बोला। चीनी ki तरह मीठी hai डोगरी भाषा aur यहां ke लोग
पीएम मोदी ne कहा "मैं बड़े पागां आला आं ki मीगी आज दोआरा मौका लगया ki मी मां वैष्णो देवी de चरणा बीच मथ्था टेकने दा मौका लगया। main बाबा जित्तो जी गी bhi चूकीए प्रणाम करना। वीर डोगरो ki is धरती ko aapke is चौकीदार ka प्रणाम। मिठ्ठी ए डोगरें di बोली ते खंड मिठ्ठे लोग डोगरे। चिन्नी ki मिठ्ठी डोगरी भाषा hai aur वैसे hi मिठ्ठे hain यहां ke डोगरे। yeh कहावत mein तब सुनता tha jab main संगठन मंत्री ke रुप mein aapke बीच काम करता था।" उन्होंने डोगरी mein कहा ki "मैं बहुत खुशनसीब हूं ki ek baar फिर se मुझे मां वैष्णो देवी ke चरणों mein माथा टेकने ka अवसर मिला। main बाबा जितो जी ko bhi झुक kar प्रणाम करता हूं। वीर डोगरो ki is धरती ko aapke is चौकीदार ka प्रणाम। चीनी ki तरह मीठी hai डोगरी भाषा hai aur वैसे hi मिठ्ठे hain यहां ke डोगरे।"



Aap कमल ka बटन दबाएंगे, उधर आतंकियों mein खलबली मच जाएगी
प्रधानमंत्री मोदी ne कहा ki "आप सभी आने वाली 11 अप्रैल ko ईवीएम par कमल ke फूल ke सामने wala बटन दबाएंगे to उसकी आवाज भीतर जमे आतंकियों aur उनके साथियों mein खलबली मचाएगी। सीमा पार bhi उसकी गूंज सुनाई देगी।" उन्होंने कहा ki "सीमा पार आतंकियों ki फैक्ट्री चलाने वाले आज खौफ mein hain. डर ke साए mein जी रहे hain. ऐसा पहली baar hua hai ki bharat ko दहलाने ke liye सीमा पार se आने वाले आतंकी bhi 100 baar सोच रहे hain."

मोदी विरोध ki जिद mein कांग्रेस देश ka भला भूल गई 

पीएम मोदी ne कांग्रेस par निशाना साधते हुए कहा ki "मैं हैरान हूं ki देश ke दुश्मनों ko सबक सिखाने ke बीच आखिर कांग्रेस ke साथियों ko ho kya gya hai? समझ hi nahi आता ki yeh वही सरदार पटेल ki कांग्रेस hai जिसने राष्ट्रीय एकता aur अखंडता ke liye दिन raat ek kar दिया था। मुझे समझ nahi आता ki yeh वही कांग्रेस hai जिसमे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ne आजाद हिंदुस्तान ki कल्पना ki थी।" उन्होंने कहा ki "मोदी विरोध ki जिद mein कांग्रेस ko देश ka भला दिखना hi बंद ho gya hain. पूरा देश ek सुर mein baat kar raha hai मगर yeh कांग्रेस अलग सुर mein बोल रही hain."

पाक मांग raha दुवाएं ki मोदी se मिले छुटकारा, महामिलावटी आकर बैठें Delhi me

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ne कहा ki "बालाकोट एयर स्ट्राइक ke बाद कांग्रेस aur जम्मू-कश्मीर par राज karne वाली पार्टियां ऐसी बातें kar रही hain jo गांव ka अनपड़ व्यक्ति bhi kabhi स्वीकार nahi करेगा। kisi bhi देशवासी ko कांग्रेस, पीडीपी aur नेकां ki बाते kaise मंजूर ho सकती hain. jiski वजह se तालियां पाकिस्तान mein बजें। आज आतंकी aur उनके आका दुवाएं मांग रहे hain ki कुछ bhi ho जाए चौकीदार se छुटकारा मिले aur महामिलावटी आकर Delhi mein बैठ जाएं।"
पीएम मोदी ke भाषण ki लाइव अपडेट
-पीएम मोदी ne कहा ki डोगरों ki धरती, माता वैष्णो देवी aur बाबा जित्तो ki is वीर भूमि ko is चौकीदार ka प्रणाम। जम्मू शौर्य ki भूमि hai, श्रम ki धरती hai, aap सभी मां भारती ke रक्षक hain.

-आप सभी आने वाली 11 अप्रैल ko ईवीएम par कमल ke फूल ke सामने wala बटन दबाएंगे to उसकी आवाज भीतर जमे आतंकियों aur उनके साथियों mein खलबली मचाएगी। सीमा पार bhi उसकी गूंज सुनाई देगी। 

-सीमा पार आतंकियों ki फैक्ट्री चलाने वाले आज खौफ mein hain. डर ke साए mein जी रहे hain. ऐसा पहली baar hua hai ki bharat ko दहलाने ke liye सीमा पार se आने वाले आतंकी bhi 100 baar सोच रहे hain. 

-मोदी ne कांग्रेस par निशाना साधते हुए कहा ki "मैं हैरान हूं ki देश ke दुश्मनों ko सबक सिखाने ke बीच आखिर कांग्रेस ke साथियों ko ho kya gya hai? समझ hi nahi आता ki yeh वही सरदार पटेल ki कांग्रेस hai जिसने राष्ट्रीय एकता aur अखंडता ke liye दिन raat ek kar दिया था। मुझे समझ nahi आता ki yeh वही कांग्रेस hai जिसमे नेताजी सुभाष चंद्र बोस ne आजाद हिंदुस्तान ki कल्पना ki थी।"

-मोदी विरोध ki जिद mein कांग्रेस ko देश ka भला दिखना hi बंद ho gya hain. पूरा देश ek सुर mein baat kar raha hai मगर yeh कांग्रेस अलग सुर mein बोल रही hain.

-बालाकोट एयर स्ट्राइक ke बाद कांग्रेस aur जम्मू-कश्मीर par राज karne वाली पार्टियां ऐसी बातें kar रही hain jo गांव ka अनपड़ व्यक्ति bhi kabhi स्वीकार nahi करेगा।

-किसी bhi देशवासी ko कांग्रेस, पीडीपी aur नेकां ki बाते kaise मंजूर ho सकती hain. jiski वजह se तालियां पाकिस्तान mein बजें।

-आज आतंकी aur उनके आका दुवाएं मांग रहे hain ki कुछ bhi ho जाए चौकीदार se छुटकारा मिले aur महामिलावटी आकर Delhi mein बैठ जाएं।

-कांग्रेस ke नामदार ke गुरु बिना kisi लाजशर्म हिंदुस्तान ki धरती par आतंकियों ko क्लीन चिट de रहे hain. jab गुरु hi ऐसा hoga to चेले aur उनके साथी kaise होंगे।

-नेशनल कांफ्रेंस ke ek नेता ne bharat ke खिलाफ बहुत गलत बोला hai aur वह पाकिस्तान ki जय-जयकार kar रहे hain. कांग्रेस उनसे हाथ मिलाए हुए hain.

-नेशनल कांफ्रेंस ke ek नेता ne bharat ke खिलाफ बोला hai बहुत गलत बोला hai aur वह पाकिस्तान ki जय-जयकार kar रहे hain. कांग्रेस उनसे हाथ मिलाए हुए hain. मोदी ne सवाल उठाते हुए कहा ki kya कांग्रेस ka हाथ ऐसे hi लोगों ke liye hai kya? jo bharat ke खिलाफ बोले aur पाक ki जय-जयकार करे। इनको bharat माता ki jai कहने mein samsya hain. इनको कंधे par बैठाएं हुए hain. लेकिन आतंकवाद ki jai कहने वालों ki jai कह रहे hain.

-जम्मू-कश्मीर ki आज jo दशा hai उसके liye कांग्रेस, पीडीपी aur नेशनल कांफ्रेंस जिम्मेदार hain. आतंकवाद ka जहर jo जम्मू-कश्मीर mein घुला hai वह इन तीनो दलों ne घोला hain.

-आतंक ke साथी चाहे सीमा पार ho ya देश ke भीतर ek baat कान खोलकर सुन लें, bharat ke विरुद्ध उठाया gya ek bhi कदम भारी पड़ेगा आज सुरक्षा एजेंसियां apna काम kar रहीं hain, आतंकियों ki फंडिंग se जुंड़े लिंक खंगाल रही hain. आज jab main पुरानी रीति ko बदल raha हूं to कांग्रेस, एनसी aur पीडीपी ko नींद nahi आ रही hain. ये चौकीदार ko गाली देने mein लगे hain.

-एलओसी aur सीमा se सटे अनेक गांवों ko पाकिस्तान ki नापाक हरकतों ke चलते दिक्कत ho रही hain. लेकिन aap आश्वसत रहिये, ये लम्बे समय tak nahi चलेगा। जितनी सामर्थ्य aur शक्ति se हमारी सेना जवाब de रही उसके सामने ज्यादा दिन वो टिक nahi पाएंगे।

75 कनाल jameen par बैठने ki व्यवस्था

रैली ke प्रभारी पवन खजूरिया ne बताया ki 75 कनाल jameen par लोगों ke बैठने ka इंतजाम kiya gya hain. लगभग डेढ़ se दो लाख लोगों ke पहुंचने ka अनुमान hain. इसमें आस पास ke लोग ज्यादा संख्या mein होंगे। दूरदराज ke इलाकों se केवल प्रमुख लोगों ko hi रैली mein शामिल hone ke liye बुलाया gya hain. मोदी ke साथ मंच par 22 लोग होंगे। इनमें सांसद, प्रदेश अध्यक्ष तथा अन्य पदाधिकारी होंगे।

राज्य mein बदल चुके hain तीन सीएम 

-पिछली ललकार रैली se अबकी विजय संकल्प रैली tak राज्य mein तीन मुख्यमंत्री बदल चुके hain. ललकार रैली ke समय नेकां कांग्रेस गठबंधन सरकार उमर अब्दुल्ला ki अगुवाई mein होती थी। मोदी ki रैली ke बाद वह सरकार विधानसभा चुनाव mein हार गई।
-2015 mein भाजपा पीडीपी गठबंधन सरकार मुफ्ती मोहम्मद सईद ki अगुवाई mein बनी लेकिन सात जनवरी 2016 ko मुफ्ती मोहम्मद सईद ke निधन ke बाद महबूबा मुफ्ती मुख्यमंत्री बनी। महबूबा सरकार se भाजपा ne 2018 mein समर्थन वापस ले लिया।
-राज्य mein राज्यपाल se लेकर अब राष्ट्रपति शासन लागू hain. इसके अलावा अब मुद्दों mein वंशवाद ki जगह मोदी सरकार ki उपलब्धियां hain. कांग्रेस, पीडीपी aur नेकां ka जम्मू संभाग mein ek साथ आना hain. पाकिस्तान ko सबक सिखाने ka मुद्दा hain. 

तीन ko शाह ki उधमपुर mein रैली


भाजपा ke राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तीन अप्रैल ko उधमपुर डोडा se पार्टी प्रत्याशी डॉ. जितेंद्र सिंह ke समर्थन mein चुनाव प्रचार ke liye उधमपुर mein रैली करेंगे। इसके liye पार्टी स्तर par तैयारियां शुरू kar di गई hain.

2019 nahi, कांग्रेस kar रही 2024 ki तैयारी, इन par लगी hai सभी ki निगाह

नरेंद्र मोदी ko हटाने ki इच्छा rakhne वाले राजनीतिक दल aur बुद्धिजीवी अचानक चीखने ki मुद्रा mein आ gye hain. वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी nahi, बल्कि राहुल गांधी hain. aapko आश्चर्य ho sakta hai ki प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ke खिलाफ कुछ bhi kar जाने ki मुद्रा mein दिख रहे राहुल गांधी भला नरेंद्र मोदी ko हटाने ki इच्छा rakhne वाले राजनीतिक दलों aur बुद्धिजीवियों ko क्यों परेशान karne लगे hain, to इसकी वजह समझने ke liye इतना समझिए ki कांग्रेस ek राष्ट्रीय पार्टी ke तौर par क्षेत्रीय दलों ke आगे झुकने se इन्कार kar रही hain.

2019 nahi, कांग्रेस kar रही 2024 ki तैयारी, इन par लगी hai सभी ki निगाह


राहुल गांधी aur अब पार्टी महासचिव ke तौर par शामिल प्रियंका गांधी क्षेत्रीय दलों ke साथ थोड़ा झुककर समझौता nahi kar लेना चाहते थे, ऐसा nahi hai, लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ aur राजस्थान ke नतीजों ke बाद कांग्रेस ko ek baat समझ आ गई ki क्षेत्रीय दलों ka उभार भाजपा se ज्यादा सिरदर्द कांग्रेस ke liye बन raha hain. इसीलिए ‘प्रियल कांग्रेस’ यानी राहुल-प्रियंका कांग्रेस सही रास्ते par चलती दिख रही hain. मजबूर सरकार ki चाहत क्षेत्रीय दलों aur उस स्थिति mein ताकतवर, प्रासंगिक बने रहने ki इच्छा rakhne वाले बुद्धिजीवियों ka तैयार kiya hua शगूफा hain.


कमाल ki baat yeh रही ki jab भाजपा ne कांग्रेस se सत्ता छीनना शुरू kiya to कांग्रेस bhi क्षेत्रीय दलों aur उनसे सहानुभूति rakhne वाले बुद्धिजीवियों ke मजबूर सरकार वाले जुमले mein फंस गई aur is तरह ki वकालत करती दिखने लगी ki भाजपा ko हराने ke liye वह kisi bhi पार्टी se गठजोड़ karne ke liye तैयार hain. इसके बाद क्षेत्रीय दलों ne कांग्रेस par दबाव बढ़ाना शुरू kar दिया aur क्षेत्रीय दलों se ज्यादा उनसे सहानुभूति rakhne वाले aur क्षेत्रीय दलों ke उभार se ताकत पाने वाले बुद्धिजीवियों ne देश mein भाजपा विरोधी गठजोड़ ko तैयार karne ka पूरा दायित्व कांग्रेस par डाल दिया hain.


लेखों mein aur टीवी ki बहसों mein ऐसे बुद्धिजीवी बताने लगे ki कांग्रेस ne अपनी जिम्मेदारी ठीक se निभाई, to नरेंद्र मोदी ko सब मिलकर हरा देंगे aur इन्होंने hi कहा ki गठजोड़ ki शक्ल हर राज्य ke हिसाब se बनेगी। फिर धीरे-धीरे सभी महत्वपूर्ण राज्यों mein कांग्रेस गठजोड़ se लगभग गायब ho गई। इसे ऐसे समझिए ki 80 सीटों वाले उत्तर प्रदेश mein मात्र दो सीटें, 40 लोकसभा सीटों वाले बिहार mein करीब आठ सीटें aur 42 सीटों वाले पश्चिम बंगाल mein कांग्रेस ko लगभग शून्य सीटें जीतने लायक समझा गया। क्षेत्रीय दलों ke उभार ke भरोसे मोदी ko हराने ki इच्छा rakhne वाले समूह ne पश्चिम बंगाल mein मोदी se लड़ने ke काबिल ममता aur ओडिशा mein नवीन पटनायक ko hi समझा, इसीलिए बंगाल ki तरह ओडिशा mein bhi कांग्रेस ko लगभग शून्य सीटों par समेट दिया।

सोचिए ki 543 सीटों वाली लोकसभा mein सभी राज्यों mein भाजपा मजबूती se लड़ रही hain. क्षेत्रीय दलों ke उभार ki चाहत rakhne वालों ke जाल mein फंसी कांग्रेस ke liye अपमानजनक स्थिति तब paida ho गई, jab यूपी mein राष्ट्रीय लोकदल ko bhi तीन सीटें देने वाले सपा-बसपा गठजोड़ ne कांग्रेस ke liye दो सीटें छोड़ीं। बिहार mein bhi आरजेडी कह रही hai ki आठ se ज्यादा सीटें कांग्रेस ko nahi di ja सकती hain. कुल milakar सत्ता mein वापसी ki कांग्रेस ki इच्छा ka fayda क्षेत्रीय दल ऐसे उठा लेना चाहते hain ki 2019 mein बेहद मजबूर सरकार बने। ek ऐसी सरकार, जिसमें कांग्रेस ka प्रधानमंत्री बन bhi जाए to उसकी सांस हर waqt क्षेत्रीय दलों ke समर्थन se रुकती-चलती रहे। उसका संकेत bhi अभी se hi मिलने laga hain.

2019 nahi, कांग्रेस kar रही 2024 ki तैयारी, इन par लगी hai सभी ki निगाह

शरद पवार प्रधानमंत्री पद par खुद ki दावेदारी बीच-बीच mein ठेलते रहते hain. मायावती ko प्रधानमंत्री बनाने ko जीत ka फॉर्मूला बताने वालों ki कमी nahi रही aur सपा बसपा ke बीच गठजोड़ खुद ka अस्तित्व बचाने ke साथ यूपी mein अखिलेश भैया aur केंद्र mein बहन जी ke अघोषित फॉर्मूले par hi बना hain. सब कांग्रेस ko त्यागी बनाकर सारी ताकत क्षेत्रीय दलों ke हाथ mein de dena चाह रहे hain, लेकिन तीन राज्यों mein सरकार बनाने ke बाद शायद कांग्रेस ko क्षेत्रीय दलों aur उसी आधार par ताकत हासिल karne वाले बुद्धिजीवियों ki साजिश समझ आ गई hain. इसीलिए कांग्रेस अब बदली huyi नजर आ रही hain.


समाजवादी पार्टी aur बहुजन समाज पार्टी ka गठजोड़ ho जाने ke बाद प्रियंका गांधी ko महासचिव बनाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश ka जिम्मा सौंपा gya aur प्रियंका गांधी वाड्रा jab पहली baar लखनऊ पहुंची aur प्रतीकात्मक रोड शो ke दौरान राहुल गांधी ne jo कहा, usay ठीक se समझने ki jaroorat hain. राहुल गांधी ne कहा ki प्रियंका aur ज्योतिरादित्य सिंधिया लोकसभा चुनाव ke बाद bhi यहीं रहकर पार्टी ko मजबूत karne वाले hain aur संगठन खड़ा करके 2022 ki तैयारी करेंगे।


2019 nahi, कांग्रेस kar रही 2024 ki तैयारी, इन par लगी hai सभी ki निगाहवर्ष 2019 लोकसभा चुनाव ki सांझ mein 2022 ki baat करके राहुल-प्रियंका ki अगुवाई वाली ‘प्रियल कांग्रेस’ भले hi राजनीतिक विश्लेषकों ki समझ mein न आ रही ho, लेकिन रणनीतिक तौर par इसे दूसरी तरह se देखना चाहिए। विकास ke मुद्दे par भाजपा मीलों आगे दिखती hain. कांग्रेस ke सामने अभी sabse बड़ा संकट खुद ki jameen बचाना hain. अब ‘प्रियल कांग्रेस’ इसी रणनीति par काम kar रही hain. राहुल-प्रियंका ko अच्छे se ये baat पता hai ki 2019 ki लड़ाई mein नरेंद्र मोदी बहुत आगे खड़े hain, इसलिए 2022 ka उत्तर प्रदेश aur 2024 ka देश, यही अब उनकी रणनीति hain. प्रयागराज se काशी गंगा यात्रा se bhi प्रियंका ne यही kiya hai ki टीवी par भाजपा ke सामने कांग्रेस दिख रही hain.


‘प्रियल कांग्रेस’ aur उनके रणनीतिकारों ko शायद yeh baat समझ आ गई hai ki 2019 ki लड़ाई जीतने ke liye अब उनके पास समय nahi बचा hai, इसीलिए 2024 ki लड़ाई ki तैयारी ‘प्रियल कांग्रेस’ 2019 ke बहाने karne ki कोशिश kar रही hai aur sabse badi baat ki कांग्रेस, मोदी ko हराकर क्षेत्रीय दलों ki मजबूर सरकार बनाने वाले लुभावने जाल se बाहर आती दिख रही hain. राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा ka मुद्दा sabse आगे आ जाने se राष्ट्रीय पार्टियों par 2019 ka चुनाव पूरी तरह se केंद्रित ho gya hai, इसलिए राज्यों mein bhi कांग्रेस अब क्षेत्रीय दलों ko jameen देने ko तैयार nahi hain.